The Other Side
एक मशहूर कलाकार ने , एक गरम दोपहर अपने कमरे मै फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जैसे ही उसकी आत्मा उसके शरीर से आज़ाद हुई, वह अपने बेजान पड़े मृत शरीर को दो टुक देखता रहा । उसे यकीन नहीं हुआ की वो ऐसा कर पाया । उसे अपने दर्द से मुक्ति मिल चुकी थी। उसे एक अलग सी आज़ादी का अनुभव हुआ। लाज़मी है की , सांसारिक दुखो से मुक्ति तो सुख का ही अनुभव देगी। उसे लगा की अब वो सुखी है। उसका ह्रदय शांत है। वो अपने कमरे में अपनी पसंदीदा चीज़ो को देखता और एक आखरी बार उन्हें छूने की कोशिश करता , पर अफ़सोस की कुछ छू ना पाता। शरीर त्याग देने के बाद उसकी आत्मा को ये परमिशन नहीं थी की वो संसार से किसी भी तरह से कांटेक्ट कर पाए।
वो सब देख और सुन पा रहा था, पर उसका रिएक्शन कोई देख सुन नहीं सकता था। थोड़ी ही देर मै उसके घर में लोग जमा होगये। देश भर में खलबली मच गई ये सुनकर, की इतने होनहार कलकार , इतने विद्वान व्यक्ति , समृद्धि व्यक्ति ने आखिर आत्महत्या क्यों की ? वो सबको अपने दिल का दर्द बताना चाहता था , लेकिन शायद अब बहुत देर हो चली थी।
वो अभी वहां खड़े अपने मृत शरीर को स्ट्रेचर पर जाता देख ही रहा था , की यमदूत आ पुँहचे। " चलिए जनाब , ये है आपका डेस्क नंबर। " उन्होंने उसके टी शर्ट पर एक नंबर चिपका दिया और उसे परलोक ले गए। बहुत भीड़ लगी हुई थी। एक यमदूत ने बोला, "इस वायरस ने बड़ा वर्क लोड बढ़ा रखा है। वो लम्बी लाइन देख रहे हो कलाकार साहब , वो सब वायरस से हार कर यहाँ खड़े है।" उस लाइन मै दुनिया के हर कोने के लोगो की आत्माये थी , कुछ छोटी थी तो कुछ उम्र दराज़ थी। उन सब को एक एक कर यमराज के समक्ष जाना था , और नया शरीर धारण कर , करमअनुसार दुनिया में वापस जाना था, वे सब जैसे ही परलोक पुँहचे थे उनसे उनकी पिछले जनम की स्मृतिया छीन ली गयी थी , सिंपल वर्ड्स में कहे तो , वे मुक्त हो गए थे। लेकिन यमदूतो के साथ परलोक के द्वार पर खड़े कलाकार को सब याद था। "ऐसा क्यों ?" उसने यमदूतो से पूछा। यमदूतो ने बताया की आत्महत्या करने वालो के लिए प्रोसीजर ज़रा अलग था।
कलाकार स्तब्ध था , असमंजस में था , उसे कुछ समझ ना आया , और ना ही वो पूछने की हिम्मत भी जुटा पाया। यमदूत उसे एक बड़े से कमरे में ले गए। उस कमरे में बहुत से लोग थे , छोटे , बड़े , गोरे, काले। सब एक सुपर कंप्यूटर के सामने बैठे थे। सामने एक दीवार पर बड़ा सा स्क्रीन लगा था। उस पर जब एक नंबर फ़्लैश होता , उस नंबर की आत्मा को उठ कर यमराज के समक्ष जाना पड़ता।
कलाकार भी अपने नंबर वाले कंप्यूटर के सामने जाकर बैठ गया। उसके आस पास जितने लोग बैठे थे सबने हैडफ़ोन लगा रखे थे , सबकी आँखें नम थी। ये आंसू उन स्मृतियों का रिजल्ट थे जो अब भी इन सब के पास थी। कलाकर ने भी हैडफ़ोन उठाया और अपने कानो पर फिट कर लिए। परस्पर ही उसके सामने उसके सामने स्क्रीन पर, उसके मृत्यु के बाद जो कोलाहल मचा हुआ था , उसकी सारी अपडेट आने लगी वो ध्यान लगा कर देखता रहा, और पढता रहा। इतना प्यार उमड़ रहा था उसके लिए , जितना उसने अपने जीवन काल मै नहीं देखा थ।
इस प्यार ने उस पर कुछ ऐसा असर किया जो महीनो से चल रही उसकी एंटी डेप्रेस्सेंट दवाईया ना कर पाई। वो यही स्नेह तो ढूंढ रहा था , लेकिन ये सब उमड़ा उसके मर जाने के बाद , उसके जीवित रहते तो लोगो ने उसे नीचा दिखने में कोई कसर ना छोड़ी थी। वो जिस इंडस्ट्री मै काम करता था वहां मुखोटा लगा कर घूमना आम बात थी , पर वो हैरान था उन दोगले मुखोटो को देख जो आज आंसू बहा रहे थे , ये वही थे जिन्होंने उसे खोखला कर दिया था। वो चीख चीख कर इनकी सच्चाई सबको बताना चाहता था , पर अफ़सोस अब उसे कोई कहा सुन सकता था।
उसे दुःख था की वो चुप रह गया , अपने दर्द अपने दिल में दफ़न कर चला आया। वो बहुत कुछ कहना चाहता था , वो जीना भी चाहता था , उसने कोशिश भी की , पर समाज के जजमेंटल ऐटिटूड ने उसे बेज़ुबान कर दिया था। कहने को उसकी दुनिया मै इतनी चकाचौंद थी , उसके जीवन को जीना बहुत लोगो का सपना था , लेकिन वो अंदर से तनहा था , इतना की उसकी तन्हाई उसके जीवन का खौफ बन गई थी। वो लड़ कर थक गया था। जब उसकी थकान ने उसके सोचने समझने की क्षमता को क्षीण कर दिया , तो वो कपडा गले में बाँध पंखे पर झूल गया ,
उस कंप्यूटर स्क्रीन की ओर देख उसके आंसू थमते नहीं थे , वो सबको बताना चाहता था की उसे सिर्फ acceptance ओर प्यार ही तो चाहिए था , अफ़सोस वो इतना मेहंगा था , की उसकी अपार दौलत उसे खरीद ना सकी। क्यों की वो कलाकार था , फेमस था उसकी मौत का तमाशा तो बनना ही था। उसने सोचा भी ना था ,की उसके इस कदम का ऐसा भी अंजाम होगा। उस स्क्रीन पर वो अपने स्नेह जनो को रोता देख रहा। जो सच में उससे प्यार करते थे , उनकी आँखों में उस अनसुलझे सवाल को परस्पर देख रहा था,की आखिर इतनी छोटी उम्र में वो कलाकार ऐसे क्यों चला गया ?
उसका मन छटपटाया, वो एक बार अपने आपनो को गले लगाना चाहता था , वो खुद को एक और मौका देना चाहता था। ये भाव उसके साथ बैठे उस कमरे में सभी लोगो के थे। उनके डिप्रेशन ने उन्हें क्षीण कर दिया था , वो लोगो के द्वारा दिए हुए जजमेंट , रजेक्शन्स और ताने सुन सुन कर तंग आगये थे। समाज जो आज उनके लिए आंसू बहा रहा था , वही समाज उन्हें उस स्तिथि तक ले गया था। काश ये प्रेम , ये अपनापन समाज ने समय रहते जताया होता , तो ये कमरा ऐसे खचा खच भरा ना होता।
दीवार पर लगे स्क्रीन पर कलाकार का नंबर आया , यमराज ने उसे बुलाया। उसने अपने दिल का सारा हाल उन्हें सुनाया।
सब सुनकर यमराज बोले , "क्यों अपनी ख़ुशी को दुसरो के पैमाने में तोलते हो , क्यों उनके अप्रूवल को ultimate समझते हो , सफतला के मायने सबके लिए अलग है , क्यों किसी और की नज़रो में अपनी सफलता ढूंढते हो ?
मुकम्मल जहान तो ईश्वर ने किसी को नहीं दिया, क्यों इस तरह नहीं सोचते हो?
खैर , अब जाने दो जो हुआ ,सो हुआ , शायद समाज तुम्हारी मृत्यु से कुछ अधिक संवेदनशील बन पाए , सम्बन्धो और व्यहवार को पैसे और पावर से ज़्यादा महत्व दे पाए। यहाँ तो उन दोनों में से साथ कुछ नहीं आता , बस कर्मो की balance sheet का evaluation होता है। और नयी लाइफ का allotment किया जाता है।
तुम तो प्रतिभा का भडांर थे , पर शायद अपनी मृत्यु से दुनिया को एक सबक सीखा आये , शायद अब वे सुधर जाए और मानवीय संवेदनाओ को हानि ना पोहचाए, मै उम्मीद करता हु परलोक का वो सुसाइड सेक्शन एक दिन बंद हो जायेगा , जब कोई इंसान अपनी जान खुद लेकर यहाँ नहीं आएग।
अब जाओ फिर से शुरुवात करो। ईश्वर तुम्हारा कल्याण करे।" यमराज ने ये शब्द कलाकार से कहे , उसे आशीर्वाद दिए और उसकी आत्मा से स्मृतिया वापस ले ली। स्मृतिया तो चली गयी पर उसकी आत्मा ने experience के कुछ कण समेट लिए और नया शरीर धारण करने की कतार में जा खड़ा हुआ !
Disclaimer : The content written above is a work of fiction. It is not written with an intent to harm or hurt the feelings of any particular person, community or industry

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