Majbur main Nahi !

मजबूर मै नही, 
मजबूर तो ये हालात है। 
हिला सके मेरे हौसले को
कहाँ इनकी इतनी औकात है। 
गुलाम नही मै इनका, 
ये शणभंगुर जज़्बात है। 

आज़माएश् है मेरी हिम्मत की
बेड़ियों का जोर कुछ खास है। 
रोक सकेंगी मुझे कैसे? 
मेरे जज़्बे मे तो आग है। 
मजबूर मै नही, 
मजबूर तो ये हालात है। 

सब्र और सयम् की औढ़ चुनर, 
विश्वास से किया अपना शृंगार है। 
स्वाद बदल दे हर चुनौती का, 
प्रयत्न की ऐसी मिठास है। 
समय भी करवट लेगा, 
अंधेरी रात के बाद 
सुनहरी सुबह की आस है। 
मजबूर मै नही, 
मजबूर तो ये हालात है। 



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